अहिल्या उद्धार की कथा सुन भावुक हुये श्रोता

RtvBharat24
सीतापुर।

पिसावां कस्बे के पश्चिम सतहा वाली देवी मंदिर पर चल रही रामकथा के चौथे दिन कथा वाचिका साध्वी अनुराधा रामायणी ने कथा श्रवण कराते हुये कहा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ चलते चलते उपवन के मध्य स्थित ब्रह्म स्थल को एक निर्जन अवस्था में पाया। ये देख राम बोले भगवन् यह स्थान देखने में तो आश्रम जैसा दिखाई देता है किन्तु क्या कारण है कि यहाँ कोई ऋषि या मुनि दिखाई नहीं देते विश्वामित्र जी ने बताया, यह स्थान कभी महर्षि गौतम का आश्रम था। वे अपनी पत्नी के साथ यहाँ रह कर तपस्या करते थे। एक दिन जब गौतम ऋषि आश्रम के बाहर गये हुये थे तो उनकी अनुपस्थिति में इन्द्र ने गौतम ऋषि के वेश में आकर अहिल्या से प्रणय याचना की।अहिल्या ने इन्द्र को नहीं पहचाना,ऋषि गौतम को जानकर अहिल्या ने प्रणय हेतु अपनी स्वीकृति दे दी। जब इन्द्र अपने लोक लौट रहे थे तभी अपने आश्रम को वापस आते हुये गौतम ऋषि की दृष्टि इन्द्र पर पड़ी जो उन्हीं का वेश धारण किये हुये था। वे सब कुछ समझ गये और उन्होंने इन्द्र को शाप दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को शाप दिया कि वर्षों तक एक पत्थर की तरह पड़ी रहे। जब राम इस वन में प्रवेश करेंगे तभी उनकी कृपा से तेरा उद्धार होगा। यह कह कर गौतम ऋषि इस आश्रम को छोड़कर हिमालय पर जाकर तपस्या करने लगे। विश्वामित्र जी ने कहा हे राम अब तुम आश्रम के अन्दर जाकर अहिल्या का उद्धार करो।।विश्वामित्र जी की बात सुनकर वे दोनों भाई आश्रम के भीतर जाते हैं। और अहिल्या का उद्धार करते है। जब अहिल्या की दृष्टि राम पर पड़ी तो उनके पवित्र दर्शन पाकर एक बार फिर सुन्दर नारी के रूप में दिखाई देने लगी। नारी रूप में अहिल्या को राम और लक्ष्मण ने श्रद्धापूर्वक उनके चरण स्पर्श किये।

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