स्वार्थलोलुपता ने निष्ठा,समर्पण को कर दिया तार तार

Rtv Bharat24
*कुर्सी की लोलुपता के आगे बौने हो गये रिश्ते
*महर्षि दधीच की धरती पर लिखा गया एक काला अध्याय

सीतापुर । जप तप न होई यहि काला,हे विधि कौन विधि मिलै यह बाला। रामायण की यह पंक्तियाँ मौजदा समय पर सटीक बैठ रही हैं। महत्वाकांक्षा इंसान को अंधा कर देती है,नाते रिश्ते उपकार सब पीछे छूट जातें हैं। वर्तमान में इसका जीता जागता उदाहरण महर्षि दधीच का मिश्रिख है।जहाँ कभी लोक कल्याण के लिऐ दधीच ने अपने शरीर का दान कर दिया था उसी धरती के इतिहास पर एक काला दाग शुक्रवार को जुड़ गया। नैमिष-मिश्रिख की धरती पर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले बाहुबली ओमप्रकाश गुप्ता की बगिया में तो वैसे अनेको फूल लगे थे लेकिन राम किंकर पांडे नाम का फूल उनकी खुशबू को एक झटके में उड़ा देगा, शायद मरहूम ओम प्रकाश गुप्ता ने अपने जीवन काल में सोचा भी नही होगा। पारिवारिक सदस्य के रूप मेंं राम किंकर पान्डे ने ख्याति से लेकर सत्ता की मलाई जमकर काटी। पारिवारिक व जमीनी स्तर पर विरोध के बावजूद अनूप गुप्ता ने उन्हे न चाहते हुऐ भी मिश्रिख से उठाकर पिसावांं के ब्लाक प्रमुखी की कुर्सी पर विराजमान कराया। इस दौरान तमाम विरोधाभास भी हुआ।परिणामस्वरूप अनूप गुप्ता को चुनाव में हार का मुंह देखना पडा। इतना सब कुछ होने के बावजूद प्रमुखी में आये अविश्वास में अनूप गुप्ता ने अपने पिता की जिंदादिली को बरक़रार रखते हुये रामकिंकर को अभयदान देकर सत्ता के मंसूबो को ढेर कर दिया। लेकिन उन्हें ज़रा भी भान नही होगा कि वह जिस शख्स के लिऐ जद्दोजहद करने में जुटे है वह अपनी महत्वाकांक्षा के लिए अपने पितातुल्य स्वर्गीय ओमप्रकाश गुप्ता के स्वप्नो को तार तार कर परिवार की प्रतिष्ठा को कलंकित कर देगा। फिलहाल सीतापुर के राजनैतिक पटल पर हुए घटनाक्रम ने जहाँ सबको स्तब्ध कर दिया है वहीं आने वाले समय मे राजनीत की दिशा बदलने के आसार दिखने लगे है। पूर्व विधायक अनूप गुप्ता ने इस के संकेत भी दे दिए है। देखना है राजनीति किस ओर करवट बदलेगी।

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