पत्रकार संतोष के प्रयास से खुशी खुशी सज गयी दुल्हन के हांथो की मेहंदी

RtvBharat24.
फफक कर रो पड़ी एक दूजे के हाल पर,मजहब और इंसानियत की जब मुलाकात हुई!

(Mishra Rohit)
सीतापुर। “चाहे तुम करो न करम:
होती रहेगी आरजू-ए-रहम”! यह पंक्तियाँ नगर महोली के विकास नगर(चमारन टोला) में गुरबत का जीनव बसर करने वाले एक बाल्मीकि परिवार पर असर कर गयीं। बीते मंगलवार को बाल्मीकि परिवार की बेवा रामगुनी की लाडली बिटिया अर्चना की शादी थी। पिता का साया 15 वर्ष पहले ही उसके सिर से उठ गया था। रोज कमाने धमाने की जददोजहद में रामगुनी परिवार का भरण पोषण करने में वयस्त थी। दिन बदला साल बदला स्यानी हो चली बिटिया की शादी करना किसी चुनौती से कम न था। लग्न तो तय हो गयी तारीख के आते आते शादी कैसे निपटेगी का दायित्व बेवा माॅ पर भारी पड़ रहा था। इसकी भनक लगते ही इंसानियत से लबरेज कुछ इंसानी शक्लों ने सोशल मीडिया पर एक बेटी की शादी की फिक्र करते हुऐ अभियान चलाया। जिसमें पत्रकार संतोष दीक्षित ने अग्रणी भूमिका अदा की। कहते है इंसान तो हर घर में जन्म लेता है,बस इंसानियत कहीं-कहीं ही जन्म लेती है। पत्रकार संतोष की मुहिम रंग लाई तो इंसानियत के पक्षधर आगे आये। जिसमेँ भारतीय किसान यूनियन अवध के कार्यवाहक अध्यक्ष श्यामू शुक्ला ने बढ़ चढ़ सहयोग किया। श्यामू ने बाकायदा दान दहेज में देने वाले हर सामान फ्रिज,कूलर,पंखा,कुर्सी मेज,सिंगारदान,बर्तन,राशन सामग्री व नकदी देकर बिटिया अर्चना की शादी की खुशियों को गगन तक पहुँचा दिया। अर्चना की शादी की खुशियों में तमाम हाँथ बढ़े जिसमे पत्रकार नीलू गुप्ता,मोनू दीक्षित,जितेन्द्र शुक्ला,विद्या मंदिर के प्रवक्ता विश्ववीर सिंह,अभिनव पाठक सहित तमाम इंसानी चेहरो ने आगे आकर शादी की खुशियों को बढ़ाने मे भरपूर सहयोग किया। मंगलवार को मिश्रिख इलाके से आयी बारात की खूब खातिरदारी हुई। मेहंदी रचे हांथो को जब कई सहारे मिले तो…
“फफक कर रो पड़ी एक दूजे के हाल पर,मजहब और इंसानियत की जब मुलाकात हुई!

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