जज्बा हो तो आसान हो जाती है राह

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पुरानी साइकिले ढूँढ जरूरतमंदो को करायीं उपलब्ध
सिधौली(सीतापुर)
कुछ साल पहले तक साइकिल आम लोगों की सवारी होती थी। लेकिन आज शहरीकरण और आधुनिकता की दौड़ में इंसान ने साइकिल की सवारी को काफी पीछे छोड़ दिया है। शहरों में आज ज्यादातर ऐसे लोग साइकिल चलाते मिलेंगे जो अपनी फिटनेस बरकरार रखने के लिये ऐसा करते हैं या फिर बच्चे जिनके लिए साइकिल चलाना महज एक खेल का हिस्सा है। जो कुछ वक्त बाद घर के बाहर किसी कोने में ऐसे ही पड़ी रहती हैं। दूसरी ओर हमारे गांवों में आज भी लाखों ऐसे बच्चें हैं जिनके पास साइकिल न होने के कारण वो पैदल ही कई किलोमीटर दूर स्कूल पढ़ने के लिए जाते हैं। ऐसे ग्रामीण बच्चों की परेशानियों को समझा कर सीतापुर जनपद के कस्बा कमलापुर की एक स्कूली छात्रा आरुषी तिवारी ने जो आज ऐसे ग्रामीण बच्चों को पुरानी साइकिल मुहैया कराने का जिम्मा उठा रही हैं। आरूषी ने ‘साइकिल रीसाइकिल’ प्रोजेक्ट की शुरूआत की है। साइकिल रीसाइकिल’ प्रोजेक्ट की शुरूआत तब हुई जब आरूषी जूनियर सेक्शन से पास होकरकस्बे के राजा कालेज मे पढने आई। वहां पर उन्होने दूर गांव के बच्चों को पैदल स्कूल आते देखा। ये बच्चें गरीब घरों से आते थे जिस कारण से वे कभी समय से स्कूल नही आ पाते थे । तब आरूषी ने सोचा कि अगर इन बच्चों को साइकिल मिल जाय तो इनको स्कूल आना कितनी आसान बन जायेगा। तो इन बच्चों की परेशानी का जिक्र अपने परिजनो से किया। परिजनो द्रारा हौशला बढाते हुये साथ देना का वादा किया जिसके बाद आरूषी तुरंत ही ये जानने के लिए जुट गई कि उनके जानने वालो के पास कितनी बेकार साइकिलें खड़ीं हैं। और उन से मिलने के बाद उन्हें पता चला कि 9 साइकिलें वहां पर यूं ही बेकार खड़ी हैं। जिसे वे उन गरीब बच्चों को दान में देने के लिए तैयार थे। तब आरूषी ने अपने भाइयो की मदद से उन साइकिलों को उठाकर उन्हें ठीक कराया जिसमें 7000 हजार का खर्चा आया। हर साइकिल में तीन सौ से एक हजार तक का खर्च आया, जिसके बाद उन साइकिलों को दो वर्ष पहले दूर गांव से स्कूल आने वाले बच्चो को दे दिया था । आरूषी ने अपने काम को विस्तार देने के लिए इस मुहिम को नाम दिया ‘साइकिल रीसाइकिल’। धीरे धीरे उनके इस काम को दूसरे लोग भी जुड़ने लगे। जिससे आरूषी में इस काम को लेकर एक नई ऊर्जा पैदा हुई। जिससे उन्होने अभी तक अलग अलग सोसाइटी जाकर 27 साइकिलें इकट्ठा की और उन्हें ठीक कराकर दूर गांव के बच्चों में बांट दी।

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कापी किताब ड्रेस व फीस का भी कराती है इंतजाम

कमलापुर(सीतापुर)नन्ही समाज सेविका आरूषी तिवारी अपने जेब खर्चे व अन्य लोगो से सहयोग लेकर गरीब परिवार के एक दर्जन से ऊपर बच्चो को कापी किताब ड्रेस और अन्य पठन पाठन सामग्री के साथ साथ फीस भी उपलब्ध करवा रही है।

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