मादक पदार्थों की बिक्री के लिऐ मुफीद हब बन चुका है महोली

RtvBharat24

*चिप्पड,स्मैक,गांजा की बड़ी खेप के लिऐ प्रसिद्ध हो चुका महोली का इलाका*

*नशे की लत के आदी हो चुके हैं युवा*
*खुलेआम बिकता है मादक पदार्थ*

सीतापुर। एन 24 के हाइवे पर बसा महोली कस्बा कभी शकर की मिठास लिऐ ऐशिया में जाना जाता था वहीं इसी इलाके की देशी मिठाई (गुड़) यूपी बिहार के तमाम जिलों में एक बड़ा रोजगार दे रही है। कुछ वर्षों से शकर की मिठास कम हो गयी और मादक पदार्थों की बिक्री ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया। अभी हाल ही में एसटीएफ ने बड़े पैमाने पर बन रही अवैध शराब का भंडाफोड़ किया था। स्मैक की बिक्री के लिऐ बडागांव का इलाका नशेबाजो के लिऐ किसी वरदान से कम नही था। लेकिन कुछ जाबाज व नशाखोरी के खिलाफ रहने वाले पुलिस के जिम्मेदारों ने स्मैक के कारोबारियो की कमर तोड़ने में अपनी पूरी उर्जा झोंक दी थी। समय बदला दिन बदला साल बदला स्मैक का कारोबार शनै शनै चलता रहा। इस का सेवन करने वाले तमाम लोग काल के गाल में समा गये। वही इसी दौरान चोरी राहजनी की घटनाऐ बेतहासा बढ़ी।
वर्तमान में चिप्पड नामक मादक पदार्थ के लिऐ महोली इलाका व कस्बा सुर्खियों में है। इस की लत पाले सैकड़ो हजारो नौजवान नशे में अपना भविष्य दांव पर लगाये हैं। सूत्र बताते हैं बड़े पैमाने पर बिक रहे चिप्पड को इसके धंधेबाज बड़े ही शातिराना अंदाज से सप्लाई कर मालामाल हो रहे हैं। कस्बे व ग्रामीण इलाके के एक गाँव से संचालित हो रहा यह धंधा सिगरेट के माध्यम से धडल्ले से बेचा रहा है। इसके लिऐ चुनिंदा दुकानो(गुमटियों)को इस्तेमाल किया जा रहा है। सुबह शाम इन गुमटियों पर नौजवानो की आवाजाही देखी जाती है। बड़ी तादात में युवा कम पैसे में अपने मनमाफिक नशे की लत में डूबकर मस्त है। इसको लेकर कारोबारियों का एक बड़ा जाल बिछा है। कुछ चुनिंदा नौजवानों के माध्यम से युवाओ के गुटों में पहले इसकी लत लगाई जाती है साथ ही पैसा पैदा करने का गुर भी सिखाया जाता है। कुछ नौजवान धीरे धीरे नशे के आदी होने के चलते इसके कारोबार में भी उतर चुके हैं। यह धंधा इतनी चालाकी से चलाया जाता है इसका कोड नाम बताने पर ही गुमटी वाला देने के लिऐ राजी होता है। कस्बे व ग्रामीण इलाके में यह धंधा बड़ी आसानी से चल रहा है। शर्मनाक पहलू यह है न तो इस धंधे के रहनुमाओ पर कभी जिम्मेदारों की नजर गयी और न ही इसको लेकर कोई अभियान चला। परिणाम स्वरूप इस धंधे को गति मिलती रही। लगभग 5 वर्षो से इस धंधे को पंख लगे और चुनिंदा जगहो से इसका विस्तार होता चला गया। धंधेबाज मालामाल होते चले गये और युवा पीढ़ी मस्त एवं परिवारीजन पस्त होते रहे। नशे का काला कारोबार कितना विस्तार लेगा या इस पर लगाम लगाये जाने के प्रयास होंगे यह एक बडा सवाल है ? नशे की लत में डूब चुके भटके युवाओ को इससे निजात मिलेगी यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन मौजूदा समय में मादक पदार्थों की बिक्री के लिऐ हब बन चुका महोली इलाका सुर्खियों में बना है।

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